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जनपद के कर्मचारी और अधिकारी ने खुल्लमखुल्ला करोड़ों के भ्रष्टाचार को अंजाम दे दिया,मैक ऑटो इंडिया- नई दिल्ली और मकीना एसोसिएट- इंदौर सहित सभी आरोपियों के बैंक खाते सीज

By,वामन पोटे

जनपद के कर्मचारी और अधिकारी ने खुल्लमखुल्ला करोड़ों के भ्रष्टाचार को अंजाम दे दिया,मैक ऑटो इंडिया- नई दिल्ली और
मकीना एसोसिएट- इंदौर
सहित सभी आरोपियों के बैंक खाते सीज

स्वच्छ भारत मिशन में 13 करोड़ का घोटाला:बैतूल में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर ने बिना काम किए फर्जी भुगतान, 12 लोगों पर FIR

बैतूल।।मध्यप्रदेश  की मोहन सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने की बात करती है, लेकिन बैतूल  में यादव की मंशा को दरकिनार करते हुए जनपद के कर्मचारी और अधिकारी खुल्लमखुल्ला करोड़ों के भ्रष्टाचार को अंजाम दे दिया. हालात, ये हैं कि जिले की भीमपुर और चिचोली जनपद  में विकास कार्य सिर्फ कागजों में हो रहा है. धरातल पर विकास कार्य देखने को आपको कहीं नहीं मिलेगा. कुल मिलाकर बैतूल के जिम्मेदार अधिकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के मिशन को बदनाम करने लगे हैं. इधर जिला प्रशासन ने आरोपियों के बैंक खाते सीज कर होल्ड लगा दिया है।प्रशासनिक सूत्रो ने बताया कि इस मामले में जनपद के सीईओ की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।जांच के बाद और आरोपियों के नाम भी सामने आने की चर्चा है।सूत्रो ने बताया कि कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ बीते दिनों भीमपुर जनपद स्वच्छ भारत मिशन में बड़ी गड़बड़ी मिलने के बाद जनपद पंचायत भीमपुर में जांच के बाद 2 घंटे तक अपने वाहन में ही बैठकर सलाह मशविरा करते देखे गए । वहीं चिचोली जनपद में भी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ 18 मार्च की शाम सात बजे से रात ग्यारह बजे तक मामले के तहत पहुंचने की कवायद करते रहे।
बैतूल जिले में आदिवासी बाहुल्य भीमपुर और चिचोली विकासखंड में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बिना किसी काम के ही 13 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किए जाने का बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें एक ब्लॉक कोऑर्डिनेटर ने दिल्ली और इंदौर की कंपनियों को फर्जी डिमांड जनरेट कर करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया। इस मामले में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी की जांच के बाद 10 लोगों के खिलाफ बुधवार रात धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

4 साल से चल रही थी गड़बड़ी, कलेक्टर ने पकड़ा
स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर राजेंद्र परिहार ने खुद को वेंडर बनाकर और अन्य वेंडरों के नाम पर फर्जी भुगतान किया। इसके लिए चिचोली और भीमपुर ब्लॉक के कंप्यूटर ऑपरेटरों का सहारा लिया गया, जो जनपद पंचायत के डिजिटल सिग्नेचर के जिम्मेदार थे। कलेक्टर ने इस गड़बड़ी की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की, जिसमें जिला कोषालय अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी और परियोजना अधिकारी शामिल थे। जांच के बाद जिला पंचायत की लेखा अधिकारी इंदिरा महतो की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
12 लोगों पर दर्ज हुई FIR
इस घोटाले में 12 लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। जिनमें अधिकारी, कर्मचारी और निजी कंपनियां शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों पर धारा 420, 409, 34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया है।

सरकारी धन के गबन के ये है आरोपी

राजेंद्र परिहार- ब्लॉक समन्वयक अधिकारी, चिचोली एवं भीमपुर

सुरकेश कहार- कंप्यूटर ऑपरेटर, चिचोली

सुमित सोनी – कंप्यूटर ऑपरेटर, भीमपुर

आशीष कंस्ट्रक्शन- चिचोली

बीरबल रावत- चिचोली

जमदू अहके- चिचोली

मैक ऑटो इंडिया- नई दिल्ली

मकीना एसोसिएट- इंदौर

सपना इवने- चिचोली

शिवलु इवने- चिचोली

शॉपिंग भंडार- इंदौर

सोनू शिवनकर- चिचोली

कागजों में बना डाला करोड़ों का घोटाला
इस घोटाले में 13 करोड़ 21 लाख 71 हजार रुपए की आर्थिक अनियमितता उजागर हुई है। इसमें चिचोली जनपद पंचायत से 9 करोड़ 13 लाख 36 हजार 700 रुपए और भीमपुर जनपद पंचायत से 4 करोड़ 8 लाख 34 हजार रुपए का गबन किया गया।
यह राशि ग्रे वाटर मैनेजमेंट सिस्टम, शोक पिट निर्माण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, नाडेप, लिच पीट, सार्वजनिक और व्यक्तिगत शौचालयों के नाम पर निकाली गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
ऐसे चलता था घोटाला
जनपद पंचायत के सीईओ की डिवाइस से ब्लॉक कार्डिनेटर राजेंद्र परिहार ने यह भुगतान किया। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर की भी भूमिका सामने आई है। इस घोटाले में भीमपुर जनपद पंचायत में मकीना एसोसिएट को 9 बार वेंडर बनाया। राजेंद्र परिहार को तीन बार और शॉपिंग भंडार को चार बार वेंडर बनाकर 4 करोड़ 8 लाख 34 हजार रुपए का भुगतान किया गया। इस जनपद पंचायत में मकीना एसोसिएट और शापिंग भंडार को सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए 2023 में सबसे अधिक राशि डाली गई। वहीं, राजेंद्र परिहार के नाम पर इन्फर्मेशन एजुकेशन और कम्युनिकेशन के लिए राशि का भुगतान किया गया है।
सीईओ की भूमिका संदिग्ध
इस घोटाले में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। तीन पॉइंट्स में समझे…

डीडीओ पावर और PFMS वाउचर अप्रूवल सीईओ के अधीन होते हैं।

सीईओ के मोबाइल पर भुगतान का मैसेज आता है, फिर भी गड़बड़ी जारी रही।

कंप्यूटर ऑपरेटर, जिनका इस घोटाले में सीधा हाथ है, वे भी सीईओ के अधीन काम करते थे।

गौरतलब है कि आरोपियों ने 2 नवंबर 2021 से 5 मार्च 2025 तक करोड़ों का गबन किया। इस दौरान चिचोली और भीमपुर जनपद पंचायत में अलग-अलग अधिकारियों ने सीईओ के रूप में कार्यभार संभाला, लेकिन किसी ने घोटाले को नहीं रोका।

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